जिला प्रोफाइल
परिचय :-
हरियाली के आँचल में स्थित साहेबगंज आदिवासी बाहुल्य जिला है। जो कि संथाल परगना प्रमंडलीय क्षेत्र के अन्तगर्त आता है। साहेबगंज जिला संथाल परगना प्रमंडल के पूर्वोक्त भाग में स्थित है। पुराने संथाल परगना प्रमंडल जिले के राजमहल तथा पाकुड़ अनुमंडल को मिलाकर, 17.05.1983 को साहेबगंज जिला अस्तित्व में आया था। 1994 में पाकुड़ अनुमंडल को अलग जिले के रूप में मान्यता मिलने से साहेबगंज जिले में केवल राजमहल तथा साहेबगंज अनुमंडल का इलाका रह गया।
भौगोलिक स्थिति :-
साहेबगंज जिला लगभग 24042' उत्तर एवं 25021' उत्तर अक्षांद्गा एवं 87025' एवं 87054' पूर्व देशांतर में अवस्थित है। गंगा नदी के तट पर अवस्थित साहेबगंज शहर, साहेबगंज जिला का प्रशासनिक मुखयालय है। साहेबगंज शहर गंगा नदी के किनारे 25015' उत्तर आक्षांद्गा एवं 87038' पूर्व देशांतर में अवस्थित है। जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 1599.00 वर्ग कि0मी0 है।
जिले के उत्तर की तरफ गंगा नदी तथा कटिहार जिला, दक्षिण की तरफ पाकुड़ जिला, पश्चिम दिशा में भागलपुर तथा गोड्डा जिला और पूर्व दिशा में गंगा नदी तथा पश्चिम बंगाल के मालदा तथा मुर्शिदावाद जिला अवस्थित है।
वर्तमान में साहेबगंज जिले की प्रशासनिक इकाईयां निम्नवत है :-
अनुमंडल |
प्रखंड |
अंचल |
ग्राम पंचायतो की संखया |
गाँवों की संख्या |
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|---|---|---|---|---|---|---|
कुल |
चिरागी |
बेचिरागी |
||||
1.साहेबगंज |
1.साहेबगंज |
1.साहेबगंज |
11 |
32 |
23 |
09 |
2.मंडरो |
2.मंडरो |
12 |
228 |
179 |
49 |
|
3.बोरियो |
3.बोरियो |
17 |
344 |
264 |
80 |
|
4.बरहेट |
4.बरहेट |
22 |
275 |
190 |
85 |
|
2.राजमहल |
5.तालझारी |
5.तालझारी |
13 |
273 |
195 |
78 |
6.राजमहल |
6.राजमहल |
23 |
147 |
98 |
49 |
|
7.उघवा |
7.उघवा |
26 |
129 |
79 |
50 |
|
8.पतना |
8.पतना |
13 |
150 |
124 |
26 |
|
9.बड़हरवा |
9.बड़हरवा |
29 |
241 |
155 |
86 |
|
कुल :- |
166 |
1819 |
1307 |
512 |
||
Tजिले में गॉंवों की कुल सं0- 1819 है। जिसमें 1307 गाँव चिरगी एवं 512 गाँव बेचिरगी है।
प्राकृतिक दृद्गिटकोण :- नदियाँ :-
गंगा नदी जो इस जिले के उत्तरी सीमा है, उत्तरी पश्चिम कोना से आकर सकरीगली के पास दक्षिण की तरफ मुड़ते हुए राजमहल अनुमंडल के राधानगर तक जिले की सीमा के रूप में बहती है। वर्तमान में गंगा नदी धीरे-धीरे उत्तर की तरफ धारा बदलती जा रही है। साहेबगंज शहर जो कभी नदी के किनारे हुआ करता था अभी एक मील दूर हो गया है। जिले में गंगा नदी की चौड़ाई करीब 4 से 5 कि0 मी0 है। नदी में सामान्य तौर पर वर्षा में बाढ़ आती है और रेल लाईन के पूर्वी इलाके पानी से भर जाती है। साहेबगंज से फेरी बोट के द्वारा गंगा नदी पार की जाती है। इस तरह कटिहार जिले के मनिहारी के साथ साहेबगंज जुड़ा हुआ है। उसी तरह राजमहल और मालदा जिला के मानीचक घाट के बीच भी फेरी बोट चलता है।
वन एवं पर्यावरण :-
पशुपालन :-
मत्स्य पालन :-
खनिज सम्पदा :-
उद्योग :-
व्यापार :-
यातायात :-
(क) सड़क मार्ग :-
T:- जिले में सड़कों का जाल बिछा हुआ है तथा सभी मुखय स्थलों को सड़कों से जोड़ा गया है। फरक्का से भागलपुर मार्ग को राष्ट््रीय उच्च पथ के रूप में उत्क्रमित कर उसका निर्माण का कार्य किया जा रहा है।
(ख) रेल :-
पूर्व रेलवे के भागलपुर-मालदा लूप लाईन पर पड़ने से साहेबगंज में रेल सेवाओं का ज्यादा अधिक विस्तार नहीं हो सका है। फिर भी यहॉं से पटना, हावड़ा, नई दिल्ली तथा गौहाटी जाने के लिए सीधे टे्रन सेवा उपलब्ध है।
(ग) जल मार्ग :-
गंगा नदी जल मार्ग का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। साहेबगंज से कटिहार जिले (बिहार) मनिहारी घाट तथा राजमहल से मालदा जिले के (प0 ब0) के मानिकचक घाट तक नियमित रूप से फेरी बोट के द्वारा वाहन तथा लोगों को दूसरे छोर पहुँचाया जाता है।
(घ) बिजली व्यवस्था :-
जिले का बहुत बड़ा भाग पहाड़ी ईलाका है। साहेबगंज जिले का कुछ भाग दामिन ई-कोह इलाके में पड़ता है। पहाड़ों के बीच अवस्थित इस भू-भाग को दामिन ई-कोह के रूप में जाना जाता है। यह एक पार्शियन शब्द है। इस पार्शियन शब्द का अर्थ द्रैापतजे वि ीपससेच्च् होता है।
भौगोलिक दृष्टिकोण से साहेबगंज जिला को दो भागों में बांटा जा सकता है। इस पहाड़ी इलाके में दामिन और गैरदामिन इलाके अवस्थित है। जिले के 5 प्रखंड मंडरो, बोरियो, बरहेट, तालझारी और पतना दामिन इलाके में पड़ता है। दामिन-ई-कोह इलाके का भू-भाग साहेबगंज, गोड्डा और दुमका जिला में फैला हुआ है, जिसमें इस भूभाग का प्रमुख हिस्सा साहेबगंज और पाकुड़ जिला में पड़ता है। इस सम्पूर्ण पहाड़ों पर काफी घने जंगल हुआ करते थे जो अभी काफी घट गये हैं। इस इलाके में मुखयतः पहाड़िया, मल पहाड़िया एवं संथाल जन जाति के लोग रहते हैं। पहाड़ी क्षेत्र में बरवट्टी एवं मकई की खेती होती है।
भौगोलिक दृष्टि से दूसरा इलाका उतार चढ़ाव का और खाई का इलाका है। इस इलाके में काफी उपजाउ जमीन है, जिसमें अच्छी फसल होती है। जिले के चार प्रखंड साहेबगंज, राजमहल, उधवा एवं बड़हरवा अवस्थित है। इस इलाके में गंगा गुमानी एवं बासलोई नदी इसी इलाके में प्रवाहित होती है। इस क्षेत्र की मुखय निवासी विभिन्न जाति के मध्य वर्गीय लोग एवं पहाड़िया/संथाल हैं।
गुमानी नदी राजमहल पहाड़ों के दक्षिण हिस्से से निकलकर उत्तर पूर्वी दिशा में बरहेट के पास मुराल नदी से मिलती है। यह संयुक्त धारा जिले के सीमा के बाहर गंगा नदी में सम्मिलित होती है।
वनों के बेरोकटोक कटाई के कारण काफी घने जंगलों के लिए मशहुर इस इलाके में अभी काफी कम जंगल बचे हैं। वन विभाग द्वारा सामाजिक वाणिकी के तहत वनों को बढ़ाने के लिए कार्यक्रम चलाये जा रहे है।
साघारण तौर पर इस जिले में साल का पेड़ पाया जाता है। कुछ सागवान के वृक्ष भी पााये जाते है। लेकिन वे अच्छी गुणवत्ता वाले नहीं होते है। कुछ अन्य वृक्ष जैसे कि कटहल, बाँस, मुर्गा, सीमल, आसन और सतमल भी पाये जते है। साल और सीमल के लकडी के लट्ठे और कटहल को भारी मात्रा में जिला के बाहर व झारखण्ड के बाहर प्रदान किया जाता है।
इस जिले में पशुओं की उन्नत नस्ल दिखाई नहीं पड़ता है। जिले के मवेशी ज्यादातर कमजोर और कम उॅंचाई वाले होते हैं। इस वजह से मवेश्यिों की संखया अधिक होते हुए भी दूध की उपलब्धता काफी कम है। पशुओं की उन्नत नस्ल के लिए जिले के विभिन्न स्थानों पर कृत्रिम प्रजनन केन्द्र एवं उपकेन्द्र की स्थापना की गई है।
गंगा नदी के कारण जिले में मत्स्य पालन की काफी अधिक संभावना है। मुखयतः रेहू, कतला, हिलसा, टेंगरा यहॉं की नदियों में पाई जाती है। डॉंलफीन मछली भी अक्सर देखी जा सकती है।
राजमहल पहाड़ी अपने खनिज सम्पदा के लिए मशहुर रहा है। सड़क बनाने के और भवन निर्माण के कार्य में लगने वाले मेटल स्टोन इन पहाड़ों में पाये जाते हैं। चीनी मिट्टी के भी भंडार राजमहल अनुमंडल के मंगलहाट के निकट पाये जाते हैं। मुलतानी मिट्टी के रूप में मशहूर बैंटोनाईट के भी भंडार इस जिले में है।
इस क्षेत्र में भारी मात्रा में उद्योग विकसीत नहीं हुए है। इसका मुखय कारण बुनियादी सुविधाओं का साथ न होना है। क्रेसर और खनन उद्योग के अतिरिक्त इस जिले में अन्य उद्योग विकसित नहीं हुआ है। आदिवासियों द्वारा निजी व्यवहार के लिए और बिक्री के लिए हस्तकरघा उद्योग चलाई जाती है। साथ ही मिट्टी के बरतन बनाने, रस्सी बनाने, बीड़ी उद्योग, लोहा तथा लकड़ी के खिलौने बनाने आदि इस जिले की प्रमुख औद्योगिक गतिविधियाँ हैं।
साहेबगंज शहर ही जिला का मुखय व्यापार केन्द्र है। खाद्यान्नों के व्यापार यहाँ प्रमुख रूप से होता है। खाद्यान्न के साथ काओलिन, मेटल स्टोन और रस्सी बनाने के धागा भी यहाँ से निर्यात किये जाते हैं। तिलहन, सरसों, तम्बाकू आदि वस्तुऐं मुखय तौर पर आयात होता है।
इस जिले में बिजली की आपूर्ति एन0टी0पी0सी0 के कहलगाँव स्थित ताप विद्युत केन्द्र से होता है। जिले के सभी प्रमुख स्थानों पर बिजली उपलब्ध है। ग्रामीण इलाके में अभी बिजली की सेवायें अधिक विकसित नहीं हो सकी है।